तेरे दर पर मैं आया अब क्या करूँ

ठहर जाऊँ  या चला जाऊँ   

मैं तो   मिलने आया पर तूने तो  पूछा भी नहीं

इतनी शर्तों को कैसे पूरा करूँ

न मैं जानूँ  कैसे न मैं जानूँ  क्यों

पर मैं ये जानूँ कि  हूँ तेरा रूहदा

कहीं भी रहूँ , तू रहे मुझ में

मैं रहूँ  या नहीं

तू सदा बाकी रहे  

आया तो था दर्शन के लिए

पर जा रहा हूँ दर से तेरे

तेरी रूह की छाप ले कर

अब कहीं भी रहूँ  

तेरी महक मुझे तेरी तस्वीर बना देगी

लोग  मुझे ही तो तू समझेंगे

तू मुझमें आ बस

अब मैं ही तेरा पता

रहगुज़र भी मैं

और पता भी  

तू भी मैं

और

मैं भी तू