याद तेरी आये तो क्या करूं

तुझे बुलाऊँ या में आऊँ

तेरी तड़प है कि जाती नही

मैं कैसे आऊँ कोई रास्ता दिखता नही

तू ही खोल इन बंद दरवाज़ों को अब

मिलने की चाह इतनी है कि

तू भी आ

और में भी आऊँ