Poem 6 RS

तेरे दर पर मैं आया अब क्या करूँ ठहर जाऊँ  या चला जाऊँ    मैं तो   मिलने आया पर तूने तो  पूछा भी नहीं इतनी शर्तों को कैसे पूरा करूँ न मैं जानूँ  कैसे न मैं जानूँ  क्यों पर मैं ये जानूँ कि  हूँ तेरा…


Poem 5 rs

मैं आया हूँ तुझ से मिलने तू भी आ अपने हर बंधन तोड़  के आ इस तरह की मैं खो जाऊँ तुझ में मैं भी आऊँ  तुझ से मिलने तेरी याद में इतनी तड़प हो कि मैं आऊँ सब से आगे तुझ से मिलने आजा अब क्या काम तेरा मुझ से…


Poem 4 RS

तेरे ही दर पर आने की ख़्वाइश है अब तू ही बता कैसे आऊँ काम तेरे करूँ और भूल जाऊँ  ख़ुद को कर दे मेरी ख़ता को माफ़ पर तेरे दर कैसे आऊँ याद आये पर आ ना पाऊँ तू ही आ मैं ना आ पाऊँ आ जा और समा जा मुझ में…


Poem 3 RS

तेरे ही दर पे अब चैन आये तुझे मिलूं तो करार आये मिलना तो हो चुका तुझ में समा के मोती ढूंढ लाऊं तो बात बन जाये तू ही बता अब क्या करूं मोती भी तू साहिर भी तू तू ही मैं मैं ही तू समा के तुझ में खुद को…


Poem 2 RS

याद तेरी आये तो क्या करूं तुझे बुलाऊँ या में आऊँ तेरी तड़प है कि जाती नही मैं कैसे आऊँ कोई रास्ता दिखता नही तू ही खोल इन बंद दरवाज़ों को अब मिलने की चाह इतनी है कि तू भी आ और में भी……


Rajni Sharma

राहगुज़र भी तेरी मेहर भी तेरी तू भी मेरा मैं भी तेरी अभी तो लुटा हूँ तेरे दर से याद भी तेरी गिरहबान भी तेरा अगर हम गुज़र गए मिले बिना याद भी तेरी अफसोस भी तेरा तूने बुलाया दर पे अपने मिलन भी तेरा वियोग…